''Akbar Rizvi"

''Akbar Rizvi"

@akbarRizvi05

Akbar Rizvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akbar Rizvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

जिस को रहती है हर घड़ी तेरी फ़िक्र ऐसे आशिक़ से दिल-लगी करना — ''Akbar Rizvi"
बस ऐसे इलाके को नज़र ढूॅंढ रही है दरिया जहाँ मिलता है समुंदर नहीं मिलता — ''Akbar Rizvi"
दूर अहबाब से रहता हूँ यूँँ ही तो अकबर न पता कौन सा इक ज़ख़्म नया मिल जाए — ''Akbar Rizvi"
ये दिसंबर भी गुज़र जाएगा पहले की तरह फिर तेरी याद में इक साल सताएगा मुझे — ''Akbar Rizvi"
वक़्त किस तरह देखो करवटें बदलता है कल जो मेरे हामी थे आज मेरे दुश्मन हैं — ''Akbar Rizvi"
अब भरोसा करें तो किस पे करें जिस तरफ़ देखो बे-वफ़ाई है — ''Akbar Rizvi"
नुसरत-ए-हक़ देखना आशूर तक ले जाएगी हसरत-ए-दीदार कोह-ए-तूर तक ले जाएगी — ''Akbar Rizvi"
बेवफ़ाई नज़र आएगी हर तरफ़ आज कल इश्क़ की कोई क़ीमत नहीं — ''Akbar Rizvi"
इन की आदत फ़रेब ओ मक्कारी ज़िक्र ही क्यूँ करें हसीनों का — ''Akbar Rizvi"
जिस सेे डरते थे ज़माने के सितमगर सारे आज के दौर का वो मालिक-ए-अश्तर न रहा — ''Akbar Rizvi"
गर जो दुश्मन भी पिलाए तो पिएँगे हँसकर चाय का हम सेे तो इनकार नहीं होता है — ''Akbar Rizvi"
ज़मीर बेच के ये भी अमीर हो जाते अगर ग़रीबों में ख़ुद्दारियाँ नहीं होती — ''Akbar Rizvi"
या'नी सुकून-ए-क़ल्ब क़ज़ा चाहता हूँ मैं इस दर्द-ए-ला-दवा की दवा चाहता हूँ मैं — ''Akbar Rizvi"
वक़्त ए मुश्किल तुम्हें ख़ालिक़ ही सहारा देगा अपने अहबाब से उम्मीद ए वफ़ा मत रखना — ''Akbar Rizvi"
नोंच खाएगा हमें 'अकबर' ज़माना है यक़ीं गर इमाम-ए-वक़्त इक लम्हे को तन्हा छोड़ दें — ''Akbar Rizvi"
ज़िक्र होता है जब हसीनों का तेरी देते हैं सब मिसाल मुझे — ''Akbar Rizvi"
बा'द में बिखरे अगर और भी होगा अफ़सोस मैं न बच्चों को नए ख़्वाब सजाने दूँगा — ''Akbar Rizvi"
तेरे क़िरदार के सफ़ीने को ख़्वाहिश-ए-नफ़्स ले के डूबेगी — ''Akbar Rizvi"
दौलते दुनिया के पीछे चल रहा है हर बशर हर बशर के पीछे लेकिन है फरिश्ता मौत का — ''Akbar Rizvi"

Ghazal

देखना अंसार को यूँँ आज़माया जाएगा कर्बला में शम्में ख़ैमा को बुझाया जाएगा उस घड़ी आमाल पा अपने तुझे होगा मलाल रोज़े महशर रुख़ से जब पर्दा हटाया जाएगा बे वफाओं का कभी जो ज़िक्र होगा सामने नाम मेरी जाँ तुम्हारा भी बुलाया जाएगा जिस्से बाटी जाएगी इश्क़ो मोहब्बत की ज़िया नफरतों के शहर में वो घर बनाया जाएगा अपनी मसनद को बचाने के लिए फिर मुल्क में भाईयों को एक दूजे से लड़ाया जाएगा याद उस को जब कभी आएगी मेरी है यक़ीं नाम हाथों पा मेरा लिख कर मिटाया जाएगा जब हुकूमत जाहिलों की आएगी तो देखना राह चलते बे गुनाहों को सताया जाएगा हम ग़ुला में मुर्तज़ा हैं मौत से डरते नहीं दार पा चढ़कर भी अकबर हक़ सुनाया जाएगा — ''Akbar Rizvi"
जो तेरे दर्द से आए थे जान बाक़ी हैं मेरे वो क़ल्ब पे सारे निशान बाक़ी हैं अभी तो चंद ही देखे हैं ज़िंदगी तू ने ना जाने कितने अभी इम्तिहान बाक़ी हैं खिलाफ़-ए-ज़ुल्म भी हक़-गोई से नहीं डरते जहाँ में ऐसे कई हम ज़बान बाक़ी हैं जो आँच आने नहीं देंगे सर ज़मीं तुझ पर हमारे मुल्क में वो नौजवान बाक़ी हैं किसी दरख़्त पे आएँगी मुश्किलें कैसे के जब तलक ये तेरे बाग़बान बाक़ी हैं जो रिश्ते देख के दौलत नहीं किया करते वो बा वक़ार अभी ख़ानदान बाक़ी हैं गुलों से जिस के निकलती है ख़ुशबू-ए-ईमाँ ज़मीं पे ऐसे कई गुलसितान बाक़ी हैं उजाड़ने को चली आँधियाँ मगर अकबर ख़ुदा का शुक्र है सारे मकान बाक़ी हैं — ''Akbar Rizvi"
जब मैं अपनो की ही महफ़िल में बुलाया ना गया मुझ सेे वो लम्हा तो हरगिज़ भी भुलाया ना गया दर्द-ए-दिल पूछा था एक शख़्स ने आ कर मुझ सेे जब सुनाने लगा तो मुझ सेे सुनाया न गया उस ज़मींदार की दौलत पा ख़ुदा हो लानत जिस सेे एक भूके को खाना भी खिलाया न गया जिस्म से आती है मेरे जो ग़रीबी की महक इस लिए ईद को सीने से लगाया न गया मुल्क का ख़ुद को निगहबान जो तू कहता है तुझ सेे एक जलता हुआ घर भी बचाया न गया इस क़दर ख़ून में डूबा था जिगर का टुकड़ा माँ से आग़ोश में बच्चे को लिटाया न गया आख़री वक़्त भी मक़तूल ने माँगा पानी और क़ातिल से उसे आब पिलाया न गया उँगलियाँ जिस सेे उठाए न ज़माना अकबर तुझ सेे किरदार अभी ऐसा बनाया न गया — ''Akbar Rizvi"