ये तुम रोज़ किस दरिया में बह रहे होये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे होये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँवो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो— Pritam sihag