बुरे हालात है तो क्या हुआ इंसान अच्छा हूँ
सभी रहते यहाँ मुझ से खफ़ा इंसान अच्छा हूँ
ये मेरी जेब में जब तक अमीरी की निशानी थी
मुझे सारा ज़माना कहता था , इंसान अच्छा हूँ
मैं तेरी बे-वफ़ाई के सभी क़िस्सों से वाक़िफ़ हूँ
मैं ने फिर भी रखी तुम से वफ़ा ,इंसान अच्छा हूँ
— Pritam sihag















