लोग इस इक बात को भी बात में ही लाते हैं
तुम भी तो शाइ'र हो क्या तुम ने मोहब्बत की कभी
तुम भी तो शाइ'र हो क्या तुम ने मोहब्बत की कभी
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सुना है ये तिरे हमदर्द के जैसे नहीं हैं हम
मोहब्बत में ये तुम भी जान लो कोई नहीं है कम
मोहब्बत में ये तुम भी जान लो कोई नहीं है कम
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हाँ उसे बातें कुछ बतानी थी
फिर हमें हाँ में हाँ मिलानी थी
फिर हमें हाँ में हाँ मिलानी थी
गर मोहब्बत कई कहानी है
तो हमारी भी इक कहानी थी
हम सफ़र तो नए नए ही है
दोस्ती तो बड़ी पुरानी थी
कारना
में बहुत किए हम ने
वो भी तो क्या अरे जवानी थी
लड़की आईना से वो सजती है
शा'इरी से हमें सजानी थी
जाम मय-ख़ाने में बचे होते
साक़ी ने और भी पिलानी थी
ढूँढ़ते हो 'निकुंज' क्या उस को
जो रवानी थी वो रवानी थी
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शाख से टूट कर काँटों पे आएँगे
हम हैं वो फूल कुचले नहीं जाएँगे
हम हैं वो फूल कुचले नहीं जाएँगे
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
लग गए है घाव जितने रख दिए है खोल कर
हो न हो इस रंज का अंजाम होना चाहिए
दिल मिरा ये थम गया है हिज्र की इक बात पर
कह रही है वो कि मुझ को आम लगना चाहिए
है नहीं कोई गिला अब है नहीं कोई दुखन
इन लबो की मुस्कुराहट को दवा बनना चाहिए
थे अकल के काम करने को जमाने में 'निकुंज'
हम वही करते रहे जो दिल समझना चाहिए
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
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