Kumar Rishi

Top 10 of Kumar Rishi

    बोलो क्या लिखूँ मैं ऐसा कि कमाल हो जाये
    सो चुके जवाबों से कोई सवाल हो जाये
    Kumar Rishi
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    जितने दिन उसके बिन गुजरते हैं
    उतने दिन हम जीते नहीं मरते हैं
    Kumar Rishi
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    चराग़ में रौशनी माना कम है
    मग़र मिरे हौंसलों में भी दम है

    हवा से है दोस्ताना मेरा भी
    उड़ान के वास्ते इक आसमाँ कम है
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    Kumar Rishi
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    ज़िन्दगी में हर किसी को हर खुशी नहीं मिलती
    मौत माँगने पर भी इस जहाँ में मौत नहीं मिलती
    Kumar Rishi
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    हमको थोड़ा वक्त दे ज़िन्दगी
    हम भी तेरे साथ चलना चाहते हैं

    जैसे निकलते हैं चाँद और सूरज
    हम भी वैसे ही निकलना चाहते हैं

    बदलते ही रूत बदलता है मौसम
    हम भी वैसे ही बदलना चाहते हैं

    सँभल जाती है धरती इतने बोझ के बाद
    हम भी वैसे ही सँभलना चाहते हैं

    मिल ही जाता है दरिया समन्दर से
    हम भी तुझसे वैसे ही मिलना चाहते हैं
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    Kumar Rishi
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    इतनी पास होके भी
    इतनी दूर क्यूँ हो तुम

    छू ना सके तुम्हें
    ऐसी अगन क्यूँ हो तुम

    देख कर भी तुम्हें देख ना सकें
    ऐसी जादूगरी क्यूँ हो तुम

    दिल में तुम बसी हो फिर भी
    बाँहों में नहीं क्यूँ हो तुम
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    Kumar Rishi
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    बड़ा बेदर्द होता है आसमान
    जमीं से छीन लेता है इन्सान
    Kumar Rishi
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    उसकी यादों में मैं पागल हुये जा रहा हूँ
    ना जाने कैसे ये ज़िन्दगी जिये जा रहा हूँ
    Kumar Rishi
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    आज फिर तेज बारिश आई
    और बहा ले गई
    एक मजदूर की झोपड़ी
    एक चिड़िया का घोंसला
    एक किसान का खेत
    एक दीवार जो कल ही
    ग़रीब मजदूर औरतों
    ने तपती धूप में बनाई थी
    बस नहीं बहा पाई तो
    भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी
    वो आलीशान इमारत
    जो तेज बारिश पर हँसती थी
    एक सवाल अब भी ज़हन में कौंधता है
    क्या प्रकृति का न्याय करने का
    यही तरीका है।
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    Kumar Rishi
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    उसके बिना ज़िन्दगी का गुज़ारा ना होगा
    हमको पता है कि वो अब हमारा ना होगा
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