इतनी पास हो के भी
इतनी दूर क्यूँ हो तुम
छू ना सके तुम्हें
ऐसी अगन क्यूँ हो तुम
देख कर भी तुम्हें देख ना सकें
ऐसी जादूगरी क्यूँ हो तुम
दिल में तुम बसी हो फिर भी
बाँहों में नहीं क्यूँ हो तुम
— Kumar Rishi
इतनी दूर क्यूँ हो तुम
छू ना सके तुम्हें
ऐसी अगन क्यूँ हो तुम
देख कर भी तुम्हें देख ना सकें
ऐसी जादूगरी क्यूँ हो तुम
दिल में तुम बसी हो फिर भी
बाँहों में नहीं क्यूँ हो तुम
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