9
0 Likes
8
0 Likes
नीम बिस्मिल हवा आरज़ी तौर पर साँस लेती रही
सांँवला एक मौसम दरख़्तों की शाख़ों पे रक्खा रहा
सांँवला एक मौसम दरख़्तों की शाख़ों पे रक्खा रहा
7
0 Likes
6
0 Likes
5
0 Likes
इसी सबब से कभी आँख भर नहीं रोए
तुझे भुलाया ही कब था जो याद करते हम
तुझे भुलाया ही कब था जो याद करते हम
4
0 Likes
रात फिर आँखों की धरती देर तक जलती रही
देर तक अश्कों का सावन टूट कर बरसा किया
देर तक अश्कों का सावन टूट कर बरसा किया
3
0 Likes
2
0 Likes
सब को अपना इश्क़ बताना रोना-धोना चिल्लाना
जो जी चाहे कर सकता है वो अपनी नादानी में
Read Fullजो जी चाहे कर सकता है वो अपनी नादानी में
1
0 Likes









