तू कि रौशन दिए की महक की तरह,सर्द रातों के दिल मेंलहकता हुआमैं कि सूरज का टुकड़ा मगर बुझ गया, शाम के दर पे आख़िर सिसकता हुआ— Moni Gopal Tapish