इक सफ़र में तन्हा छोड़ा जा चुका है
    ज़ख़्म देकर नाता तोड़ा जा चुका है

    इंतिज़ार-ए-इश्क़ करके क्या मिलेगा
    प्यार से जब राह छोड़ा जा चुका है
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    Shubham Rai 'shubh'
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    डरावनी है जो तुझ को तिरी क़ज़ा ही न हो
    न भाग इतना कि अंजाम का पता ही न हो

    दिखावे की होड़ में क्या मिले नहीं आप से
    दिखा रहे जैसे कुछ भी अता पता ही न हो
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    Shubham Rai 'shubh'
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    इक दफ़ा गुज़रे कभी फिर से गुज़र जाएँगे
    ऐ मोहब्बत अब तुझे इनकार कर जाएँगे
    Shubham Rai 'shubh'
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    दर्द ले आप के पास से आ गए
    हाँ मुलाक़ात कर ख़ास से आ गए

    और बोतल उठाया गला तर करूँ
    जाम के बाद रख प्यास भी आ गए
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    Shubham Rai 'shubh'
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    नसीब लिखने वालें ने क्या कमाल लिखा है
    ज़मीर पे मेरे धब्बा उसे रुमाल लिखा है

    मुरीद हूँ मैं शिक्षा का मज़ीद ज्ञान नहीं है
    जवाब मुश्किल हो ऐसा उसे सवाल लिखा है
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    Shubham Rai 'shubh'
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    मुश्किल घड़ी में साथ मिलना चाहिए
    हो बैर फिर भी हाथ मिलना चाहिए
    Shubham Rai 'shubh'
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    ज़िंदगी गुज़र रही है धीरे धीरे
    एक वक्त है हमारा जो ठहरा है
    Shubham Rai 'shubh'
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    ख़ूब प्यारा किनारा हो सकता है
    एक तिनका सहारा हो सकता है

    आज ईमान का माने वादा है
    क़ौल उसके गुज़ारा हो सकता है
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    Shubham Rai 'shubh'
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    ख़ुद को ख़ुद से ही बचाया कर
    आँखों में सपने सजाया कर
    Shubham Rai 'shubh'
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    तेरी ख़ुशबू साँसों में घुल जाती है
    जभी मेरे सीने तुम लग जाती हो
    Shubham Rai 'shubh'
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