हार जाऊँगा ख़ुद रक़ाबत में
    दिल दुखाना है मेरी आदत में
    Shubham Nankani
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    मोहब्बत के नशेमन से गए दोनों
    अलग रस्ते बुरे मन से गए दोनों
    Shubham Nankani
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    राह तकते हैं लोग कितने बरस
    फिर ख़ुदा से ये रूठते हैं कहीं
    Shubham Nankani
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    फूल महके है जब हो साथ ज़मीं
    फिर मिले हम महक रही वो नहीं

    राह तकते हैं लोग कितने बरस
    फिर ख़ुदा से ये रूठते हैं कहीं

    ये मुलाक़ात आख़री समझो
    फिर कहो देर तक तकूँ कि नहीं

    मुझ में अच्छा न कुछ बचा यारों
    फिर भी आयी नज़र न तुम को कमीं
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    Shubham Nankani
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    एक ही दिल के हैं ये सब जज़्बात
    जिस की चाहत है उस से ही नफ़रत
    Shubham Nankani
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    वो क्या वक़्त था याद आता है पर अब
    अजब दौर नफ़रत भी मुमकिन है उस से
    Shubham Nankani
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    दूर होते रहे क़रीबी सब
    हर क़रीबी नया है ऐसा है
    Shubham Nankani
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    बात करनी है क्या इजाज़त है
    या तुझे सब पता है ऐसा है
    Shubham Nankani
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    दरमियाँ होने से तेरे अब तक
    तुझ को आवाज़ दी गयी रब तक
    Shubham Nankani
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    ख़्वाब करते रहे दग़ा मुझ से
    मुख़्तलिफ़ सच सभी जुदा मुझ से

    महफ़िलों ने दिया है हम को क्या
    तुम मिले हो मैं हूँ मिला मुझ से

    तू न फ़ुर्क़त की भी इजाज़त ले
    और क्या चाहिए बता मुझ से

    मुस्कुराना मज़ीद है मुश्किल
    हो लतीफ़ा तो बांँटना मुझ से

    अब 'शुभम' जाल में नहीं आना
    इश्क़ आज़ाद हो गया मुझ से
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    Shubham Nankani
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