कर भी लेगें जो ख़ुद-कुशी तो क्या
मौत के बा'द ग़म नहीं होगा
मौत के बा'द ग़म नहीं होगा
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ज़िंदगी क्यूँ तुम्हें शिकायत है
दे दिया ख़ून-ए-दिल जिगर फिर भी
दे दिया ख़ून-ए-दिल जिगर फिर भी
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ज़िंदगी क्यूँ तुम्हें शिकायत है
दे दिया ख़ून-ए-जिगर फिर भी
दे दिया ख़ून-ए-जिगर फिर भी
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ज़िक्र तुम ने किया मगर फिर भी
हो रहा क्यूँ नहीं असर फिर भी
हो रहा क्यूँ नहीं असर फिर भी
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