हमने अपने हक़ की मय क्या माँग ली
    मयकदे हम से ख़फ़ा रहने लगे
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    2 Likes
    बाज़ बनना है तो फ़िर कद भूल जा
    आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

    किसलिए डरता है दीवारों से तू
    आसमांँ को देख सरहद भूल जा
    Read Full
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    2 Likes
    बेबसी है बेकसी है बेदिली है ज़िंदगी
    बस यूँ ही जीते रहे तो ख़ुदकुशी है ज़िंदगी
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    2 Likes
    हर क़दम हर साँस गिरवी ज़िंदगी रहम-ओ-करम
    इतने एहसानों पे जीने से तो मर जाना सही
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    1 Like
    सताना रूठ जाना और मनाना इश्क़ है लेकिन
    अगर हद से ज़ियादा हो तो रिश्ते टूट जाते हैं
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    6 Likes
    हमारे दिल ने पुकारा है अब चले आओ
    ज़बाँ पे नाम तुम्हारा है अब चले आओ

    फ़ज़ा में दर्द का मंज़र है रात काली है
    अजीब हाल हमारा है अब चले आओ

    हमारे पास भला और है ही क्या सोचो
    बस एक ही तो सहारा है अब चले आओ

    तुम्हारे बाद तुम्हारी हसीन यादों में
    हर एक लम्हा गुज़ारा है अब चले आओ

    ख़राब हाल ये कश्ती है डूब जाएगी
    तुम्हारा साथ किनारा है अब चले आओ
    Read Full
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    2 Likes
    सौ ज़ख़्म दिल पे हैं मेरे सौ ज़ख़्म मेरी जाँ
    क्या एक-एक दिल मेरा दिखलाए आपको
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    0 Likes
    तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है
    जीने नहीं देती यादों की पुरवाई
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    0 Likes
    इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें
    हम सुखनवर हैं बताओ शायरी कैसी करें

    बच गये तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें
    इसलिये मरने से पहले मौत को राजी करें

    मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुःख मेरी सज़ा
    आपको क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें

    बाद-ए-रुसवाई कोई गम ही नहीं रुसवाई का
    जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें

    ऐ मोहब्बत तुझसे क्यों भरता नहीं आख़िर ये दिल
    कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें

    हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की
    सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें

    वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की
    ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें

    हम को अब हमसे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ
    छोड़ दें हमको हमारे हाल बस इतनी करें

    दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं
    जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें

    दर्द ही बस दर्द और इसके अलावा कुछ नहीं
    अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें

    धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं
    इससे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें
    Read Full
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    3 Likes
    गुमान हमको नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
    जो हमसे दुश्मनी करते तो सर गये होते
    Ajeetendra Aazi Tamaam
    1 Like

Top 10 of Similar Writers