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किसी की याद में खोया हुआ हूँ किसी की बाँहों में सोने से पहले
कभी अपने भी अंदर देख जाकर,तेरे अंदर से गौतम बोल देंगे
कलेंडर ने फ़क़त तारीख़ बदली हैतुम्हारा ग़म नहीं बदला है बस 'तन्हा'
सफ़र से मैं कभी जो बच गया तोतिरे काँधे पे सोने आऊँगा मैं
मुसलसल बात मैं करता हूँ तुमसेमगर ये दिल नहीं भरता हमारा
ग़म तो उसके पीछे-वीछे रहता हैखुशियाँ सारी फ़ोटो में दिख जाती है
कैसे दिल का हाल सही हो सकता हैजब-तब यूँ तुम साड़ी में दिख जाओगी
मर जाते हो जब तुम उसके अन्दर सेख़ून बहे भी आँखों से तो क्या होगा
इतना गुस्सा आता है शहजा़दी परकैसा होगा हाल मिरी बर्बादी परबाइस को मैं आधी बाजी हारा हूँमर जाऊंँगा यार तुम्हारी शादी पर
कभी पत्थर मुक़द्दर लिख नहीं सकता मगर समझोजिसे पत्थर में ढूँढो हो तुम्हारे पास ही तो है