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जानता हूँ मैं कि तुम वा'दा फ़रामोश नहीं
बस तुम्हें याद दिलाने में मज़ा आता है
बस तुम्हें याद दिलाने में मज़ा आता है
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नदी आँखें भँवर ज़ुल्फ़ें कहाँ तैरूँ कहाँ डूबूँ
कि तेरे शहर में सब की अदाएँ एक जैसी हैं
कि तेरे शहर में सब की अदाएँ एक जैसी हैं
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मैं क़ैद था क़फ़स में और वो उड़ रहा था सामने
ये पहली बार था के पंख अहमियत में थे नहीं
सो मैं ने दिल बना के भेज डाला आप के लिए
के आप कम से कम मिरी मुख़ालिफ़त में थे नहीं
मुआ'फ़ कर दिया है हम ने सोच कर के कुछ मगर
तेरे गुनाह तो ऐ यार माज़रत में थे नहीं
वो ऐसा शख़्स जिस के चेहरे पर नक़ाब ही नक़ाब
हम ऐसे शख़्स जो कभी मुनाफ़िक़त में थे नहीं
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ऐसे असमंजस में मत डालो मुझे तुम मेरी जान
ठीक से सोचो समझ लो इश्क़ सा है इश्क़ है
ठीक से सोचो समझ लो इश्क़ सा है इश्क़ है
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तू मिला तब मुझे समझ आया
मैं समझता था इश्क़ कुछ भी नहीं
मैं समझता था इश्क़ कुछ भी नहीं
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