10
0 Likes
क्यूँ आज है दुरुस्त लड़ाई पता करो
क्यूँ फूल की दुकान हटाई पता करो
क्यूँ फूल की दुकान हटाई पता करो
ये पाँव मय-कदे कि तरफ़ बढ़ नहीं रहे
किस ने मिरी शराब छुड़ाई पता करो
ऐसी अगन मची कि मिरे ख़्वाब जल गए
कैसे हवा ने आग लगाई पता करो
इक गांव के हकीम ये कह कह के मर गए
कुछ इश्क़ का इलाज दवाई पता करो
मैं भी सदीक़ शाइरों के बीच में रहा
मेरी भी आदतें या बुराई पता करो
9
0 Likes
8
0 Likes
पेशानी में ऐसी हरकत है अब क्यूँ
फैली ख़ामोशी है दहशत है अब क्यूँ
फैली ख़ामोशी है दहशत है अब क्यूँ
अपनी-अपनी साँसें रख कर समझाओ
मुर्दों को लहदों से नफ़रत है अब क्यूँ
मुझ को हैरानी है मरने पर मेरे
दोज़ख़ में चर्चे हैं इज़्ज़त है अब क्यूँ
तुम हाथों में आतिश ले कर चलते थे
पानी से जलने की हसरत है अब क्यूँ
मिल जाती है जिन को ग़म से आज़ादी
फिर भी वो पूछेंगे ज़हमत है अब क्यूँ
तय था सूरज को गर्दिश से खीचेंगे
तरकीबों की भारी क़िल्लत है अब क्यूँ
सर पे छत है तब भी क्या नाकाफ़ी है
आख़िर दीवारों की क़ीमत है अब क्यूँ
ऊँची आवाज़ों में भरते हैं हामी
मैं भी सोचूँ सारे सहमत हैं अब क्यूँ
किन ख़्वाबों में डूबे-डूबे रहते हैं
तुझ में मुझ में सब में ग़फ़लत है अब क्यूँ
कहता है 'तुम चौथी सफ़ में आ जाओ'
रहबर को भी इतनी फ़ुर्सत है अब क्यूँ
7
2 Likes
6
0 Likes
5
0 Likes
रूमाल रख कि इन आँखों में नमी लगेगी
हाँलाकि आज मेरी बातें सही लगेगी
हाँलाकि आज मेरी बातें सही लगेगी
फिर नाम,रूतबा,दौलत या महल असासा
चाहे जहाँ बना ले,माँ की कमी लगेगी
तहसील दार अब खसरा क्यूँ दिखा रहे हैं?
फिर से तिरी गली से मेरी गली लगेगी?
अख़बार भर दिया लाशों की ख़बर बना कर
या'नी क़लम लहू से लगभग सनी लगेगी
कोई नया ख़ुदा मेरे इर्द गिर्द मत रख
असली ख़ुदा की रहमत मुझ को नहीं लगेगी
4
2 Likes
हादसे इक रात गिनती में उठे
और सब इक साथ गिनती में उठे
और सब इक साथ गिनती में उठे
या कि मैं ख़ामोश हो जाऊँ यहाँ
या मिरी हर बात गिनती में उठे
देख मेरी हल्फ़-बरदारी, ख़ुदा
देख सारे हाथ गिनती में उठे
ज़िंदगी शतरंज की बाज़ी चले
और शह या मात गिनती में उठे
बर्क़-अफ़्गन बन चुका वो आसमाँ
काश सौ बरसात गिनती में उठे
3
0 Likes
2
3 Likes
घरों में पुराने दरीचे मिलेंगे
वहाँ से दिखे तो बग़ीचे मिलेंगे
वहाँ से दिखे तो बग़ीचे मिलेंगे
हवा का हवाला बताया गया है
परिंदे सलाख़ों के पीछे मिलेंगे
दुबारा गया था वही राह पर तू
कहा था कि आगे गलीचे मिलेंगे
सितारों की लाशें छुपाते रहे ना
निगाहें कभी ये न भींचे मिलेंगे
ख़ुदा ने बनाया सजाया जहाँ को
बहाना बनाया कि नीचे मिलेंगे
सुकूँ ही इसी बात से है कि मेरे
मिरे नाम पर तीर खींचे मिलेंगे
1
2 Likes










