ज़िंदगी की रज़ा बढ़ाते थेख़ामख़ा ही सज़ा बढ़ाते थेलाश छू कर निकल गई साँसेंमौत का भी मज़ा बढ़ाते थे— Nikhil Tiwari 'Nazeel'