Meaning of

ख़ामख़ा

khaamkhaa • خامخا

व्यर्थ; बिना कारण

in vain; without reason

بے فائدہ; بلا وجہ

Persian

ख़ामख़ा ही तुझे मैं छुपाता रहा
दौर ये चल रहा है सर-ए-आम का

1

Download Image

सभी तारीफ हैं बस ख़ामखा़ की
हमारा दिल कहाँ देखा किसी ने

6

Download Image

ख़ामख़ा फूल बिछा रक्खे हो तुम उस के लिए
लौट कर कोई नहीं आता है जाने के बा'द

5

Download Image

क्या होगा फिक्र ये करें क्यूँ हम ही ख़ामख़ाह
इस हिज्र में जलाएँ न अब हम जी ख़ामख़ाह

तुम सेे बिछड़ के दिल मिरा रोया है उम्र भर
ऐसा लगा कि ज़िंदगी हमनें जी ख़ामख़ाह

4

Download Image

वो समझते भी नहीं हाल-ए-दिल
खा-म-खाँ शाद हुए जाते हैं

3

Download Image

ज़िंदगी की रज़ा बढ़ाते थे
ख़ामख़ा ही सज़ा बढ़ाते थे

लाश छू कर निकल गई साँसें
मौत का भी मज़ा बढ़ाते थे

3

Download Image

तेरे बिन भी ज़िंदा हैं हम तो अब तक शायद फिर वो
तेरे बिन मर जाएँगे लोग ख़ामख़ा कहते होंगे

2

Download Image

ख़ामख़ाँ बेवजह और क्या बोलना
बोलते बोलते ही गुज़ारी ये उम्र

1

Download Image

हड्डियाँ ख़ामख़ा ही अकड़ करती हैं
उस के छू लेने से चूर हो जाता हूँ

1

Download Image

ख़ामख़ा ही तुझे मैं छुपाता रहा
दौर ये चल रहा है सर-ए-आम का

1

Download Image

सभी तारीफ हैं बस ख़ामखा़ की
हमारा दिल कहाँ देखा किसी ने

6

Download Image

'ख़ामख़ा' शब्द उन क्रियाओं या भावनाओं का सुझाव देता है जिनका कोई उद्देश्य या औचित्य नहीं होता। यह व्यर्थता का सार और उन प्रयासों में संलग्न होने की मानव प्रवृत्ति को पकड़ता है जो निरर्थक लग सकते हैं।

कवि 'ख़ामख़ा' का उपयोग कुछ मानव क्रियाओं या भावनाओं की बेतुकापन व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रयास और परिणाम के बीच के विरोधाभास को उजागर करता है, जीवन के प्रयासों की विडंबना को रेखांकित करता है।

'ख़ामख़ा' में, कवि जीवन के विरोधाभासों और व्यर्थता में छिपे हास्य का प्रतिबिंब पाते हैं।