शर्तों पर ही प्यार करोगे ऐसा क्या
तुम जीना दुश्वार करोगे ऐसा क्या
तुम जीना दुश्वार करोगे ऐसा क्या
लोगों ने तो ज़ख़्म दिए हैं चुन चुन कर
तुम भी दिल पर वार करोगे ऐसा क्या
मुझ से रूठ के खाना पीना छोड़ दिए
ख़ुद को ही बीमार करोगे ऐसा क्या
मिलना हो तो मिल जाओ कुछ बात करें
वा'दा ही हर बार करोगे ऐसा क्या
जाने किस से लड़-भिड़ कर तुम आए हो
अब मुझ से तकरार करोगे ऐसा क्या
अब मुझ को तड़पाने की ख़ातिर तुम भी
दुश्मन से ही प्यार करोगे ऐसा क्या
10
1 Like
9
1 Like
8
1 Like
मैं दिन को रात कहूँ वो भी दिन को रात कहे
यूँ आँख मूँद के वो ऐतिबार करता है
यूँ आँख मूँद के वो ऐतिबार करता है
7
1 Like
कोई रूठा है अगर उस को मनाना होगा
भूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगा
भूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगा
जिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैले
उन चराग़ों को हवाओं से बचाना होगा
जिस की ख़ुशबू से महक जाए ये दुनिया सारी
फूल गुलशन में कोई ऐसा खिलाना होगा
हर ख़ुशी छोड़ के आ जाऊँगा तेरी ख़ातिर
शर्त ये है कि मेरा साथ निभाना होगा
दिल के रिश्तों को अगर प्यार से जोड़ा जाए
एक बंधन में बँधा सारा ज़माना होगा
चाहते हो कि मिटे सब के दिलों से नफ़रत
दुश्मनों को भी 'रज़ा' दोस्त बनाना होगा
6
1 Like
कोशिश तो की भँवर ने डुबोने की बारहा
हम कश्ती-ए-हयात बचाते चले गए
अपना कहा किसी ने गले से लगा लिया
यूँ दुश्मनों को दोस्त बनाते चले गए
रुसवाइयों के डर से कभी बज़्म-ए-नाज़ में
हँस-हँस के दर्द-ए-दिल को छुपाते चले गए
करता है जो सभी के मुक़द्दर का फ़ैसला
उस की रज़ा की शम्अ' जलाते चले गए
5
1 Like
जिस तरह से फूलों की डालियाँ महकती हैं
मेरे घर के आँगन में बेटियाँ महकती हैं
मेरे घर के आँगन में बेटियाँ महकती हैं
फूल सा बदन तेरा इस क़दर मोअत्तर है
ख़्वाब में भी छू लूँ तो उँगलियाँ महकती हैं
माँ ने जो खिलाई थीं अपने प्यारे हाथों से
ज़ेहन में अभी तक वो रोटियाँ महकती हैं
उम्र सारी गुज़री हो जिस की हक़-परस्ती में
उस की तो क़यामत तक नेकियाँ महकती हैं
हो गई 'रज़ा' रुख़्सत घर से बेटियाँ लेकिन
अब तलक निगाहों में डोलियाँ महकती हैं
4
1 Like
3
3 Likes
कहीं पर चीख़ होगी और कहीं किलकारियाँ होंगी
अगर हाकिम के आगे भूक और लाचारियाँ होंगी
अगर हाकिम के आगे भूक और लाचारियाँ होंगी
अगर हर दिल में चाहत हो शराफ़त हो सदाक़त हो
मोहब्बत का चमन होगा ख़ुशी की क्यारियाँ होंगी
किसी को शौक़ यूँ होता नहीं ग़ुरबत में जीने का
यक़ीनन सामने उस के बड़ी दुश्वारियाँ होंगी
ये होली ईद कहती है भला कब अपने हाथों में
वफ़ा का रंग होगा प्यार की पिचकारियाँ होंगी
सुख़न-वर का ये आंगन है यहाँ पर शे'र महकेंगें
ग़ज़ल और गीत नज़्मों की यहाँ फुलवारियाँ होंगी
अगर जुगनू मुक़ाबिल में है आया आज सूरज के
यक़ीनन पास उस के भी बड़ी तैयारियाँ होंगी
न छोड़ो ये समझ के आग अब ठंडी हुई होगी
ये मुमकिन है ‘रज़ा’ कुछ राख में चिंगारियाँ होंगी
2
0 Likes
मुझ को मेरे ख़यालों के पर काटने पड़े
उस की उड़ान थी मेरी औक़ात से सिवा
उस की उड़ान थी मेरी औक़ात से सिवा
1
3 Likes










