आँखों को कुछ सुस्ताने की मोहलत दोरस्ता तकते तकते गर थक जाएँ तोफिर मैं सजदा करते करते आऊँगाअपने दर पर मुझ को कभी बुलाएँ तो— SALIM RAZA REWA