
ग़मों की भीड़ दर्दों की निगहबानी में रहना है
बता ऐ ज़िन्दगी कब तक परेशानी में रहना है
वो अपने कौ़ल से वापस पलट जाए उसे हक़ है
'तपिश' हम को तो अपनी बात के पानी में रहना है
— Moni Gopal Tapish
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