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जिस दिन मिलेगी तेरी दाद मुझ को
उस दिन मैं जाँ ख़ुद को शाइ'र कहूँगा
उस दिन मैं जाँ ख़ुद को शाइ'र कहूँगा
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दिल तोड़ कर वो ख़ुश है रहे ख़ुश
मेरी तरफ़ से उस को दुआ है
धोखा उसे भी दे जाए कोई
उस के लिए मेरी बद-दुआ है
उस का नहीं हो कोई जहाँ में
उस के लिए बस ये ही सज़ा है
हालात मेरे अच्छे नहीं हैं
ये दुश्मनों को कैसे पता है
उस को दिया है सम्मान मैं ने
सम्मान जिस से मुझ को मिला है
जो बा-वफ़ा है आशिक़ जहाँ में
हर बे-वफ़ा उस से ही ख़फ़ा है
सब लोग समझो आए समझ तो
मिल कर रहो इस
में ही भला है
मेरा नहीं है कोई जहाँ में
शायद वफ़ा की ये ही सज़ा है
मेरा नमन वो स्वीकार कर लें
जिन के दिलों में सच में दया है
है पूजने के क़ाबिल वही दिल
मेरे बराबर जो दिल जला है
कोई दिवाना है क्यूँ दिवाना
कोई दिवाने से पूछता है
मैं हूँ सिटी में पर गाँव मेरा
अब रात दिन रस्ता देखता है
मिल कर रहो सब वरना जहाँ में
है कौन कब तक किस को पता है
'सागर' तिरा बस तेरा रहेगा
'सागर' तिरा बस तुझ को मिला है
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सच कहूँ मुझ को मिलेगी बस तिरी उल्फ़त
इस जहाँ में गर कहीं भगवान है लड़की
इश्क़ में दस्तार रख दूँ मैं तिरे पा में
इस क़दर तेरे लिए सम्मान है लड़की
ये तुझे शायद नहीं मालूम है पर सुन
मैं तिरा हूँ ये मिरी पहचान है लड़की
सुन सिवा मेरे तिरा दिल ग़ैर का है गर
तो बहुत इस
में तिरा नुक़सान है लड़की
मारना है जान से मुझ को मिरी जाँ तो
बस तिरी सच में बहुत मुस्कान है लड़की
आज तुझ से एक सच्ची बात कहता हूँ
मैं तिरा आशिक़ मिरी तू जान है लड़की
अब सिवा तेरे मिरा कोई नहीं होगा
ये सभी के सामने एलान है लड़की
प्यार तू ने कर लिया गर ग़ैर से तो सुन
ये वफ़ाओं का मिरी अपमान है लड़की
तू मिरी है बस मिरी ये देख कर दुनिया
आज कल सच में बहुत हैरान है लड़की
मैं सिवा तेरे किसी को भी नहीं चाहूँ
इश्क़ का मेरे लिए फ़रमान है लड़की
आज 'सागर' को मिला है प्यार तेरा तो
आज से 'सागर' तिरा धनवान है लड़की
मैं समर्पित कर रहा हूँ ये ग़ज़ल तुझ को
सच कहूँ ये इस ग़ज़ल का मान है लड़की
आज भी डरता हूँ मैं इज़हार करने से
आज भी 'सागर' तेरा नादान है लड़की
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