Ayush Aavart

Top 10 of Ayush Aavart

    "बस, इक दिन"
    इतना मतलब है मेरे इस्कूल के क़िस्से का
    उसके आगे होश नहीं रहता था बस्ते का
    हम दोनों इक दूजे को ख़त लिक्खा करते थे
    मुझको ध्यान नहीं रहता था नंबर लेने का
    वो मुझको अपना कहती थी मुझमें रहती थी
    दोस्त से बढ़कर थे पर नाम नहीं था रिश्ते का
    दोनों बातों में इस दर्ज़ा खोए रहते थे
    हमको शौक़ नहीं चढ़ता था पढ़ने लिखने का
    ग़म में हँसने के लिए साथ में दुनिया होती थी
    जब वो होती थी तो मन होता था रोने का
    बस इक दिन अचानक उसने ख़त लिखने छोड़ दिए
    अब भी मुझे मालूम नहीं सच इसके पीछे का
    उसके दिल की वो जाने और मेरे दिल की मैं
    इसके आगे हक़ नहीं मुझको कुछ भी कहने का
    Read Full
    Ayush Aavart
    10
    1 Like
    किसी का डर नहीं जो मेरे पास तुम हो तो
    रहेगा कोई भला क्यूँ उदास तुम हो तो

    जो तुम न हो तो पड़े फ़र्क़ कैसे क्या मुझको
    है होना ठीक मेरा ख़ुश-लिबास तुम हो तो

    नहीं है इंतिहा इन रंज-ओ-ग़म की माना पर
    किसी से क्या ही कहूँ ग़म-शनास तुम हो तो

    अदब की क्लास में वैसे तो जी नहीं लगता
    मगर ये क्यों नहीं आएगी रास तुम हो तो

    हूँ मानता नहीं मख़्सूस मैं तुम्हारे लिए
    मगर किसी के लिए सबसे ख़ास तुम हो तो
    Read Full
    Ayush Aavart
    0 Likes
    ये वादा कर यही होकर रहेगा
    तू मेरा आख़िरी होकर रहेगा

    नज़ारा कैसा होगा सोचो तुम जब
    सितारा आदमी होकर रहेगा

    ख़ुदा ने है नया पैगाम भेजा
    फ़लक अब इक नदी होकर रहेगा

    बुरा क्या कह दिया ये बल्ब तो अब
    है कहता चाँदनी होकर रहेगा

    नहीं लूँगा मैं अपना हिस्सा फिर भी
    ये झगड़ा आपसी होकर रहेगा

    तुझे हम जंगलों में आयेंगे छोड़
    अगर तू जंगली होकर रहेगा

    ये ज़िद करने लगा तकिया भी मेरा
    कि ये भी शायरी होकर रहेगा

    कि उसने लिख दिया जो ज़िंदगी में
    बदल लो कितना भी होकर रहेगा

    पढ़ाई नौकरी ही दे न पाई
    घड़ी का मिस्तरी होकर रहेगा

    मेरा दिल प्यार का रहता है भूखा
    हमेशा लालची होकर रहेगा

    समंदर में था दिल जाने से डरता
    मगर अब जलपरी होकर रहेगा

    हवा दीपक बनेगी और दीपक
    हवा सौ फ़ीसदी होकर रहेगा

    बग़ावत कर ली आख़िर दिल ने मुझसे
    क़सम खा ली दुखी होकर रहेगा
    Read Full
    Ayush Aavart
    3 Likes
    हर बार ही लाचार बने कौन समझता
    कब कैसे हर इक बार बने कौन समझता

    सच पहले पहल बोला नहीं हमने किसी से
    आख़िर में समझदार बने कौन समझता
    Read Full
    Ayush Aavart
    2 Likes
    वैसे तो प्यार से हर शक्ल में ढल जाता है
    पर मेरे सामने वो शख़्स बदल जाता है

    चाहता है कि ख़मोशी से रहूँ महफ़िल में
    जाने क्यों कुछ मेरा कहना उसे खल जाता है
    Read Full
    Ayush Aavart
    7 Likes
    यार तेरे हाथ में शराब का गिलास है
    आज एक घंटे बाद की हमारी क्लास है

    ऐ खुदा मुआफ़ करना मुझको था नहीं पता
    मुफ़्लिसों के पास बस फटा हुआ लिबास है

    जब तुझे ख़बर नहीं उदासी के तक़ाज़ो की
    क्यों ये दावा करता है कि तू ही ग़म शनास है

    कुछ समंदरो के हैं किनारे मुझसे पूछते
    और कुछ है या फ़क़त बुझी हुई सी आस है

    लड़की इस तरह तू सबकी बातों में न आया कर
    प्यार है तू मेरा बस न ये कि मेरी प्यास है

    शम्स हल्का हल्का जब दिखाई दे समझना तुम
    शाम होने वाली है सितारा आस पास है
    Read Full
    Ayush Aavart
    6 Likes
    मेरे साथ कल हुआ जो हादसा मज़ाक था
    किसने तुमसे ये कहा कि इश्क़ था, मज़ाक था

    मुझसे एक दिन किसी ने तीन लफ्ज़ बोले थे
    और फिर वो अगले दिन मुकर गया मज़ाक था

    तीन दिन हुए नहीं कि मर गया लगाव सब
    तब का वो तुम्हारा प्यार, वो भी क्या मज़ाक था

    वो गुलाब,चॉकलेट हाँ दिया तो था मगर
    यार वो हमारे बीच जो भी था मज़ाक था

    यारों उसको लगता है ये हिज्र, रंजोगम घुटन
    सारी उम्र ज़िंदगी ने जो सहा मज़ाक था

    मेरी ज़िंदगी में प्यार के हैं दो ही क़िस्से बस
    पहली गलती थी किसी की दूसरा मज़ाक था
    Read Full
    Ayush Aavart
    3 Likes
    गर गीत के मैं शब्द हूँ तो साज़ है सखी
    मेरी हर एक पीर की आवाज़ है सखी

    इक बात भूल बैठा तो देखो ये क्या हुआ
    मुझको अकेला कर दिया नाराज़ है सखी

    कोई न कोई राज़ सभी लोग रखते हैं
    चाहे तुम्हारा जो हो मेरा राज़ है सखी

    रिश्ता नहीं है खूँ का कोई और फिर भी तुम
    इतने क़रीब क्या कहूँ एजाज़ है सखी

    तू सुन ले शेर मेरे मगर इतना याद रख
    अल्फाज़ सारे मेरे हैं अंदाज़ है सखी
    Read Full
    Ayush Aavart
    4 Likes
    नहीं सुनता वो अब बातें मेरी चाहे कहो कुछ भी
    जो जी करता है करता है वही चाहे कहो कुछ भी

    मेरी नादानियों पर आज मुझको है बड़ा अफसोस
    गलत था मैं यही है बस सही चाहे कहो कुछ भी

    अगर वो चाहती तो प्यार से समझा भी सकती थी
    मगर उसने नहीं चाहा कभी चाहे कहो कुछ भी

    हमारे दरमियाँ सुलझा हुआ था सब मगर फिर भी
    बहुत उलझी हुई थी ज़िंदगी चाहे कहो कुछ भी

    अगर वो दोस्त थी तो छोड़कर के क्यूँ गई ऐसे
    उसे मुझसे मुहब्बत तो थी ही चाहे कहो कुछ भी

    मैं अरसे बाद जब उससे मिला तो मैंने ये पाया
    मिलन में भी किसी की थी कमी चाहे कहो कुछ भी

    बग़ावत की सज़ा मिलनी ही है 'आवर्त' धड़कन से
    क़ज़ा ही है फ़क़त सच आख़िरी चाहे कहो कुछ भी
    Read Full
    Ayush Aavart
    5 Likes
    कोई तो पंख साथ मेरा दे उड़ान में
    फैलाने हैं दो रंग मुझे आसमान में

    क़ातिल ने क़त्ल एक सरेआम है किया
    देखा नहीं है कुछ किसी ने है बयान में

    फाँसी मिलेगी कत्ल पे ऐसा उसूल क्यों
    क्या मौत से बुरा नहीं है संविधान में

    चालाकियाँ कभी भी दिखाना नहीं मुझे
    ये एक तीर है अभी मेरी कमान में

    मेरी हयात मुझसे अमूमन है पूछती
    क्यूँ जिंदा है तु सबके लिए इस जहान में

    अब हार ही गया तो मुझे मौत दे ही दो
    दो-चार दिन ही काट सकूँगा थकान में
    Read Full
    Ayush Aavart
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers