Parvez Zaami

Top 10 of Parvez Zaami

    मैं तो मुश्ताक़ हूँ उस दिन का अज़ल से 'ज़ामी'
    कब बपा हश्र हो कब उन का मैं जल्वा देखूँ

    Parvez Zaami
    1 Like

    जानाँ अफ़सोस मेरी मय्यत पर
    थोड़ा सा तो जता दिया होता

    Parvez Zaami
    4 Likes

    दुनिया कितनी ही ख़ूबसूरत हो
    आप बाहम नहीं तो कुछ भी नहीं

    Parvez Zaami
    3 Likes

    मुस्कुरा के तू गर पिलाए तो
    एक क़तरा फ़ुरात है साक़ी

    Parvez Zaami
    1 Like

    महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है
    सिंदूर तेरी माँग का उल्फ़त का नाम है

    तकलीफ़ दे रही है मुझे बे-रुख़ी तिरी
    नज़रें चुराना तेरा अज़िय्यत का नाम है

    वल्लाह पास कुछ भी नहीं ख़ार के सिवा
    जो आप माँगते हैं वो निकहत का नाम है

    कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम
    वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है

    मुरझा गए हैं फूल याँ अहद-ए-बहार में
    कश्मीर की सुना था ये जन्नत का नाम है

    पूछेगा मुझ से गर कोई बारे में इश्क़ के
    कह दूँगा साफ़-साफ़ मुसीबत का नाम है

    तुम से ये किसने कह दिया फुर्क़त-ज़दा हूँ मैं
    'ज़ामी' तो मेरी जान मसर्रत का नाम है

    Parvez Zaami
    2 Likes

    जब तलक सूरज को ग्रहण लगे 'ज़ामी'
    चाँद का क़िस्सा सुनाओ अँधेरा है

    Parvez Zaami
    2 Likes

    चश्म-ए-बद-बीन से न देख हमें
    यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग

    Parvez Zaami
    0 Likes

    अपने खूँ से चमन को सींचा है
    फिर भी बे-एतिबार हैं हम लोग

    Parvez Zaami
    1 Like

    मुरझा गए हैं फूल याँ अहद-ए-बहार में
    कश्मीर की सुना था ये जन्नत का नाम है

    Parvez Zaami
    4 Likes

    शमीम-ए-हैदर अली क़लंदर
    तू बंदा पर्वर अली क़लंदर

    सवाली जाते हैं झोली भर कर
    करम का मेहवर अली क़लंदर

    न औरों के दर से माँगते हैं
    तिरे गदागर अली क़लंदर

    वफ़ा-शिआरी तुझी से सीखी
    वफ़ा का पैकर अली क़लंदर

    पियासे आए हैं तिरे दर पर
    पिलाओ कौसर अली क़लंदर

    ये शान तेरी के तूने पाई
    वसी-मोअत्तर अली क़लंदर

    बदल दे 'ज़ामी' का तू मुक़द्दर
    निगाह-ए-मेहर अली क़लंदर

    Parvez Zaami
    1 Like

Top 10 of Similar Writers