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दुनिया कितनी ही ख़ूब-सूरत हो
आप बाहम नहीं तो कुछ भी नहीं
आप बाहम नहीं तो कुछ भी नहीं
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तकलीफ़ दे रही है मुझे बे-रुख़ी तिरी
नज़रें चुराना तेरा अज़िय्यत का नाम है
वल्लाह पास कुछ भी नहीं ख़ार के सिवा
जो आप माँगते हैं वो निकहत का नाम है
कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम
वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है
मुरझा गए हैं फूल याँ अहद-ए-बहार में
कश्मीर की सुना था ये जन्नत का नाम है
पूछेगा मुझ से गर कोई बारे में इश्क़ के
कह दूँगा साफ़-साफ़ मुसीबत का नाम है
तुम से ये किस ने कह दिया फुर्क़त-ज़दा हूँ मैं
'ज़ामी' तो मेरी जान मसर्रत का नाम है
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जब तलक सूरज को ग्रहण लगे 'ज़ामी'
चाँद का क़िस्सा सुनाओ अँधेरा है
चाँद का क़िस्सा सुनाओ अँधेरा है
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चश्म-ए-बद-बीन से न देख हमें
यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग
यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग
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अपने खूँ से चमन को सींचा है
फिर भी बे-एतिबार हैं हम लोग
फिर भी बे-एतिबार हैं हम लोग
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मुरझा गए हैं फूल याँ अहद-ए-बहार में
कश्मीर की सुना था ये जन्नत का नाम है
कश्मीर की सुना था ये जन्नत का नाम है
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Parvez Zaami
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