शमीम-ए-हैदर अली क़लंदरतू बंदा पर्वर अली क़लंदरसवाली जाते हैं झोली भर करकरम का मेहवर अली क़लंदरन औरों के दर से माँगते हैंतिरे गदागर अली क़लंदरवफ़ा-शिआरी तुझी से सीखीवफ़ा का पैकर अली क़लंदरपियासे आए हैं तिरे दर परपिलाओ कौसर अली क़लंदरये शान तेरी के तू ने पाईवसी-मोअत्तर अली क़लंदरबदल दे 'ज़ामी' का तू मुक़द्दरनिगाह-ए-मेहर अली क़लंदर— Parvez Zaami