जब उस के अश्क से ये हाथ सनता जा रहा था
हमारे दरमियाँ कुछ था जो छनता जा रहा था
हमारे दरमियाँ कुछ था जो छनता जा रहा था
ख़ुशी से छोड़ दी फिर एक दिन उस की गली भी
मैं उस से मुख़्तलिफ़ हूँ जैसा बनता जा रहा था
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ऐ सखी बे-तहाशा मोहब्बत तिरी मुझ को हर रस्म से मावरा थी मगर
उम्र तन्हा बिताने से अच्छा ये था तुम सफ़र में कोई हम-सफ़र देखते
उम्र तन्हा बिताने से अच्छा ये था तुम सफ़र में कोई हम-सफ़र देखते
ना-मुकम्मल सभी ख़्वाब हैं आज तक फिर भी बस एक दिल की ख़ुशी के लिए
चश्म-ए-हैराँ से बुनते किसी ख़्वाब को फिर उसी ख़्वाब को रात भर देखते
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इस तरह हम तुम्हारा असर देखते
ये हसीं लब ये ज़ुल्फ़ें नज़र देखते
ये हसीं लब ये ज़ुल्फ़ें नज़र देखते
शहर से जब तुम्हारे गुज़रते कभी
तो तुम्हारी गली ख़ासकर देखते
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अगर वो मेरे साथ घर से निकलती
तमन्ना मचलते मचलते मचलती
तमन्ना मचलते मचलते मचलती
कभी बारिशों में उसे थाम लेता
अगर वो फिसलते फिसलते फिसलती
वो शरमा के जब मुझ से नज़रें मिलाती
मेरी जाँ निकलते निकलते निकलती
मेरे बाज़ुओं में वो पत्थर की मूरत
ख़ुशी से पिघलते पिघलते पिघलती
ये माना है मुश्किल मगर मेरी क़िस्मत
कभी तो बदलते बदलते बदलती
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तेरा ख़ामोश हो जाना बड़ा महसूस होता था
मैं तुझ से क्या कहूँ अब और क्या महसूस होता था
Read Fullमैं तुझ से क्या कहूँ अब और क्या महसूस होता था
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उस चाँद को भी रश्क होता था उसी को देख कर
मैं भी खुले आकाश में तस्वीर उस की चूमता
मैं भी खुले आकाश में तस्वीर उस की चूमता
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मैं ने मोहब्बत की कभी ता'लीम तो ली ही नहीं
लेकिन दिलों को तोड़ना आसान है मेरे लिए
लेकिन दिलों को तोड़ना आसान है मेरे लिए
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