गर गीत के मैं शब्द हूँ तो साज़ है सखी

मेरी हर एक पीर की आवाज़ है सखी

इक बात भूल बैठा तो देखो ये क्या हुआ
मुझ को अकेला कर दिया नाराज़ है सखी

कोई न कोई राज़ सभी लोग रखते हैं
चाहे तुम्हारा जो हो मेरा राज़ है सखी

रिश्ता नहीं है खूँ का कोई और फिर भी तुम
इतने क़रीब क्या कहूँ ए'जाज़ है सखी

तू सुन ले शे'र मेरे मगर इतना याद रख
अल्फाज़ सारे मेरे हैं अंदाज़ है सखी

— Ayush Aavart

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Tanhai Shayari

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