Gulshan

Top 10 of Gulshan

    ख़ुदा ही जानता है अपनी मर्ज़ी
    वो किस कतरे को कब दरिया करेगा
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    बड़ा चालाक बनकर के मेरी तारीफ़ करता था
    ज़रूरत से अधिक तारीफ़ भी अच्छी नहीं होती
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    तुम समंदर की बात करते हो
    यहाँ आँखों से दरिया बहता है
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    यानी कोई कमी नहीं मुझ में
    यानी मुझ में कमी उन्हीं की है
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    तुमसे मिलने के बाद ऐ हमदम
    ख़ुद से बेज़ार हो गया हूँ मैं
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    यूँ तो कोई ख़ुशी नहीं लेकिन
    आदतन मुस्कुराता रहता हूँ
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    उसकी यादों को दरगुज़र करके
    मर ना जाऊंँ मैं अब बिछड़ करके
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    दर्द जब हद से गुज़र जाता है
    वो मुझे याद बहुत आता है
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    हो होली ईद या दीवाली हो कोई रंगत मुझे नहीं भाती
    वो इतनी दूर जा चुका है अब उसकी परछाई भी नहीं आती
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    दिल को इतनी बड़ी सज़ा दूँगा
    उसकी तस्वीर भी जला दूँगा
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