Gulshan

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@VaibhavPrakash

Gulshan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Gulshan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं
ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले

Gulshan

झूठा न बोलिए मुझे झूठा नहीं हूँ मैं
कह तो रहा था आपसे अच्छा नहीं हूँ मैं

Gulshan

भूखे थे और भूखे ही रह जाएँगे
मर जाएँगे हाथ नहीं फैलाएँगे

Gulshan

मेरे दस्त-ए-तमन्ना पर तुम्हारे हाथ का होना
बड़े हासिद बनाएगा बहुत से दिल जलाएगा

Gulshan

मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ
नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर

Gulshan

छोड़ रहे हो अच्छा है तुम तो ये भी कर सकते हो
मैं तो जिस से मिल जाता हूँ साथ निभाने लगता हूँ

Gulshan

खुद से नाराज़ ज़माने से ख़फ़ा रहते हैं
जाने क्या सोच के हम सब से जुदा रहते हैं

Gulshan

तुझे पाकर ज़माने की वफ़ा अच्छी नहीं लगती
सिवा तेरे किसी की भी अदा अच्छी नहीं लगती

Gulshan

सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते
इशारा लौट आने का किसी ने तो किया होता

Gulshan
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ख़ुदा ही जानता है अपनी मर्ज़ी
वो किस कतरे को कब दरिया करेगा

Gulshan
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बड़ा चालाक बनकर के मेरी तारीफ़ करता था
ज़रूरत से अधिक तारीफ़ भी अच्छी नहीं होती

Gulshan
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तुम समंदर की बात करते हो
यहाँ आँखों से दरिया बहता है

Gulshan
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यानी कोई कमी नहीं मुझ में
यानी मुझ में कमी उन्हीं की है

Gulshan
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तुमसे मिलने के बाद ऐ हमदम
ख़ुद से बेज़ार हो गया हूँ मैं

Gulshan
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यूँ तो कोई ख़ुशी नहीं लेकिन
आदतन मुस्कुराता रहता हूँ

Gulshan
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दिल की इक दुनिया बसाकर चल दिए
अपना ग़म मुझको थमाकर चल दिए

Gulshan
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उसकी यादों को दरगुज़र करके
मर ना जाऊंँ मैं अब बिछड़ करके

Gulshan
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मुझे भी इतनी अब फुर्सत नहीं बची
उसे पाने की अब हसरत नहीं बची

Gulshan
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उससे बिछड़े इक ज़माना हो गया
ज़ख्म इस दिल का पुराना हो गया

उसकी यादों से कहो अब बख़्स दें
बेहद इस दिल को सताना हो गया

Gulshan
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दर्द जब हद से गुज़र जाता है
वो मुझे याद बहुत आता है

Gulshan
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