Reshma Shaikh

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@reshmashaikhofficial01

Reshma Shaikh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Reshma Shaikh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मिलेंगी राह में दुश्वारियाँ ग़म और क्या क्या ही मुहब्बत आज़मानी है मुहब्बत कर के देखो तुम — Reshma Shaikh
हमेशा याद रखना रेश्मा तुम बताना ग़म! मगर हाँ ख़ामोशी में — Reshma Shaikh
घिरी रहती अभी तक तीरगी से मुझे लाता न तू गर रौशनी में — Reshma Shaikh
मुझे फ़ुर्सत नहीं अब वाक़ई में बहुत मसरूफ हूँ मैं ज़िन्दगी में — Reshma Shaikh
दिलों में बसे जिन के दहशत मुसलसल ख़मोशी है उन की जहालत मुसलसल — Reshma Shaikh
कौन यहाँ पे अब सच बोले मुँह पे लगे हैं सबके ताले — Reshma Shaikh
मेरा साथ अभी तू दे दे मुस्तकबिल ये हाल से बोले — Reshma Shaikh
तू भी अच्छा मैं भी अच्छी प्यार अधूरा फिर ये कैसे — Reshma Shaikh
कौन रखे चाहत मंज़िल की जिस का दिलकश रस्ता तुम हो — Reshma Shaikh
तड़पते रहे क़ब्र में लोग सारे जिन्हें बंदगी की ख़ुमारी नहीं थी — Reshma Shaikh
उसे उल्फत मिली होगी सनम से मुझे तो दुख मिले है दिल-लगी में — Reshma Shaikh
मुबारक हो तुझे ये ऐश-ओ-ईशरत मैं ख़ुश हूँ अपनी टूटी झोपड़ी में — Reshma Shaikh
दिलों का राज़ रब ही जानता है मुलव्विस कौन हैं इस मुख़्बिरी में — Reshma Shaikh
किसी में नहीं है हया अब ज़रा भी कि दम तोड़ती है शराफ़त मुसलसल — Reshma Shaikh
हया से सँवरना सदा रेश्मा तुम करे जब किसी से मुहब्बत मुसलसल — Reshma Shaikh
और मनाले थोड़ा उस को बोले दिल भी हाथ ये जोड़े — Reshma Shaikh
कितने राज़ हसीं वो खोलें जब ग़ुस्से में मुझ सेे बोलें — Reshma Shaikh
शे'र नहीं लिख पाती आगे मेरा बस इक मतला तुम हो — Reshma Shaikh
मेरी ख़्वाहिश पर जो टूटे अंबर का वो तारा तुम हो — Reshma Shaikh
तसल्ली कभी तो कभी आस देते ग़रीबी जिन्होंने गुज़ारी नहीं थी — Reshma Shaikh

Ghazal

अपना दामन मैं छुड़ाऊँ तो ग़ज़ल कह देना और गर तुझ को भुलाऊँ तो ग़ज़ल कह देना दिल में रख हौसला आँखों में वफ़ा और इस पर साथ तेरा न निभाऊँ तो ग़ज़ल कह देना तू ने पाज़ेब सजाई जो मिरे पैरों में उस की आवाज़ सुनाऊँ तो ग़ज़ल कह देना ज़िंदगी याद ख़यालों में अभी बाक़ी तू जब तुझे दिल से मिटाऊँ तो ग़ज़ल कह देना तू अगर रूठ भी जाए ये ज़माने भर से देख मैं तुझ को मनाऊँ तो ग़ज़ल कह देना ये ज़माने ने मुझे यार सताया कितना दर्द सारे ये सुनाऊँ तो ग़ज़ल कह देना अब भला कौन मेरे ज़ख़्म पे मरहम रखता मैं अगर ज़ख़्म छुपाऊँ तो ग़ज़ल कह देना फूल शबनम ये कली चाॅंद सितारों के संग नींद तेरी भी उड़ाऊँ तो ग़ज़ल कह देना — Reshma Shaikh