मेरे दिल की तमन्ना ने जब तुम को पुकारा है यादों ने अजब मौसम मेरे दिल में उतारा है दर्दों के समुंदर में आहों की रवानी है ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
सांसों में मेरे दम था बस तेरे ही होने से सब कुछ मैं गवा बैठा इक तुझको ही खोने से अब तेरे बिना कैसे सारी उम्र बितानी है ? ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
तुम्हें टूट के चाहा है, तुम्हें टूट के चाहेंगे तुम जब भी पुकारोगे हम लौट के आएँगे दुनिया यह मुहब्बत को जानेगी न जानी है ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है