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किसी ने कर लिया बर्बाद ख़ुद को
किसी को फ़र्क़ तक पड़ता नहीं है
किसी को फ़र्क़ तक पड़ता नहीं है
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ख़ुमारी इस क़दर तेरी दिमाग़-ओ-दिल पे तारी है
कि तेरे नाम के हर नाम को रिक्वेस्ट भेजी है
कि तेरे नाम के हर नाम को रिक्वेस्ट भेजी है
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रखो उम्मीद मत हम से अब वस्ल की जाना
तुम्हारा मुंतज़िर था जो वो मर गया कब का
तुम्हारा मुंतज़िर था जो वो मर गया कब का
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