तेरी आग़ोश में आया न मुझ को चाहिए कोई
तुम्हें पाया ख़ुदा पाया न मुझ को चाहिए कोई
तुम्हें पाया ख़ुदा पाया न मुझ को चाहिए कोई
तुम्हारा नाम ले ले कर कहीं ग़ज़लें कई नज़्में
तरन्नुम में तुम्हें गाया न मुझ को चाहिए कोई
सदाओं में बहारों में गुलों में ख़्वाब में हो तुम
तू ने जब प्यार बरसाया न मुझ को चाहिए कोई
दिल-ए-नादान भी शैतानियांँ करता रहें हर पल
तुम्हें माना है हम सेाया न मुझ को चाहिए कोई
मेरे नज़दीक हो सब से मेरे दिल में बसे गिरधर
मिली है प्रीत की छाया न मुझ को चाहिए कोई
तेरा चेहरा नज़र आए मुझे सारी दिशाओं में
तेरे बिन कुछ नहीं भाया न मुझ को चाहिए कोई
कभी सागर न भूलेगा करूँ मैं बारहा सजदा
मेरे मोहन से मिलवाया न मुझ को चाहिए कोई
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ख़ुशनुमा होती हमारी ज़िंदगी भी
गर हमारे तुम तुम्हारे हम हो जाते
गर हमारे तुम तुम्हारे हम हो जाते
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ज़रा सा वक़्त लगता है मगर सुन लो
नए शाइ'र हैं हम मशहूर तो होंगे
नए शाइ'र हैं हम मशहूर तो होंगे
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