तेरी आग़ोश में आया न मुझ को चाहिए कोई

तुम्हें पाया ख़ुदा पाया न मुझ को चाहिए कोई

तुम्हारा नाम ले ले कर कहीं ग़ज़लें कई नज़्में
तरन्नुम में तुम्हें गाया न मुझ को चाहिए कोई

सदाओं में बहारों में गुलों में ख़्वाब में हो तुम
तू ने जब प्यार बरसाया न मुझ को चाहिए कोई

दिल-ए-नादान भी शैतानियांँ करता रहें हर पल
तुम्हें माना है हम सेाया न मुझ को चाहिए कोई

मेरे नज़दीक हो सब से मेरे दिल में बसे गिरधर
मिली है प्रीत की छाया न मुझ को चाहिए कोई

तेरा चेहरा नज़र आए मुझे सारी दिशाओं में
तेरे बिन कुछ नहीं भाया न मुझ को चाहिए कोई

कभी सागर न भूलेगा करूँ मैं बारहा सजदा
मेरे मोहन से मिलवाया न मुझ को चाहिए कोई

— Aniket sagar

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Khuda Shayari

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