Nushur Wahidi

Nushur Wahidi

@nushur-wahidi

Nushur Wahidi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nushur Wahidi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

हज़ार शम्अ' फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए नज़र नहीं तो अँधेरा है आदमी के लिए — Nushur Wahidi
इक नज़र का फ़साना है दुनिया सौ कहानी है इक कहानी से — Nushur Wahidi
हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए — Nushur Wahidi
बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए — Nushur Wahidi
अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई — Nushur Wahidi

Ghazal

नई दुनिया मुजस्सम दिलकशी मालूम होती है मगर इस हुस्न में दिल की कमी मालूम होती है हिजाबों में नसीम-ए-ज़िंदगी मालूम होती है किसी दामन की हल्की थरथरी मालूम होती है मिरी रातों की ख़ुनकी है तिरे गेसू-ए-पुर-ख़म में ये बढ़ती छाँव भी कितनी घनी मालूम होती है वो अच्छा था जो बेड़ा मौज के रहम ओ करम पर था ख़िज़र आए तो कश्ती डूबती मालूम होती है ये दिल की तिश्नगी है या नज़र की प्यास है साक़ी हर इक बोतल जो ख़ाली है भरी मालूम होती है दम-ए-आख़िर मुदावा-ए-दिल-ए-बीमार क्या मअ'नी मुझे छोड़ो कि मुझ को नींद सी मालूम होती है दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है नसीम-ए-ज़िंदगी के सोज़ से मुरझाई जाती है ये हस्ती फूल की इक पंखुड़ी मालूम होती है जिधर देखा 'नुशूर' इक आलम-ए-दीगर नज़र आया मुसीबत में ये दुनिया अजनबी मालूम होती है — Nushur Wahidi
कभी झूटे सहारे ग़म में रास आया नहीं करते ये बादल उड़ के आते हैं मगर साया नहीं करते यही काँटे तो कुछ ख़ुद्दार हैं सेहन-ए-गुलिस्ताँ में कि शबनम के लिए दामन तो फैलाया नहीं करते वो ले लें गोशा-ए-दामन में अपने या फ़लक चुन ले मिरी आँखों में आँसू बार बार आया नहीं करते सलीक़ा जिन को होता है ग़म-ए-दौराँ में जीने का वो यूँँ शीशे को हर पत्थर से टकराया नहीं करते जो क़ीमत जानते हैं गर्द-ए-राह-ए-ज़िंदगानी की वो ठुकराई हुई दुनिया को ठुकराया नहीं करते क़दम मय-ख़ाना में रखना भी कार-ए-पुख़्ता-काराँ है जो पैमाना उठाते हैं वो थर्राया नहीं करते 'नुशूर' अहल-ए-ज़माना बात पूछो तो लरज़ते हैं वो शा'इर हैं जो हक़ कहने से कतराया नहीं करते — Nushur Wahidi