mujhe maaloom tha ik din ye hona hai | मुझे मालूम था इक दिन ये होना है

  - Aniket sagar

मुझे मालूम था इक दिन ये होना है
सभी सपने बिखरने और रोना है

हकीक़त है यहीं झुठला नहीं सकते
तुझे आख़िर कबर पर जा के सोना है

कभी शायर को लिखते वक़्त देखा था
ज़हाँ लिखता वहाँ रौशन वो कोना है

सताएं पर रुलाता वो नहीं बेशक
नसीबों में लिखा ग़म भी सलोना है

वबा इस दौर में अब कौन-सी भी हो
सभी बोले सुनो ये तो करोना है

चलाना घर सभी रिश्ते निभाने में
तुझे अब प्रेम का धागा पिरोना है

  - Aniket sagar

Udas Shayari

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