मिरे दिल में सजाना चाहता हूँ
तुझे अपना बनाना चाहता हूँ
कभी सीखा नहीं शायद ये हँसना
जी भर तुझ को हँसाना चाहता हूँ
बड़े नज़दीक से देखा जो तू ने
उसी ग़म को मिटाना चाहता हूँ
जहाँ रौशन है मुस्तक़बिल मिरा मैं
वहाँ जीवन बिताना चाहता हूँ
नज़र के सामने ला कर तुझे मैं
गले से जाँ लगाना चाहता हूँ
— Aniket sagar















