दहशत के बाज़ारों में मंदी कैसे आ सकती है अब
दहशत जो फैलाते हैं अब उन की ही तो सरकार है
जनता की जाएज़ माँगों पर बातें करें कैसे भला
चारों तरफ़ बस बिक चुके अख़बारों की भरमार है
अब ये अदाकारी तो लाज़िम होगी ही इन ख़बरों में
ख़ुद उन का हाकिम भी तो अच्छा-ख़ासा इक फ़नकार है
जिस ने सिखाई थीं वो सारी चालें उस को खेल की
वो शख़्स ख़ुद इस खेल में अब हो गया लाचार है
ये दोस्ती महँगी न पड़ जाए अमीर-ए-शहर को
कब तक चलेगी एक दिन गिरनी ये भी सरकार है
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लड़कों को इश्क़ में दिलचस्पी है
लड़कों को आता नहीं ख़ुश रहना
लड़कों को आता नहीं ख़ुश रहना
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ख़्वाब जो इक देखा है हम ने वो पूरा होना भी है
अब उसी को सोच कर के जागना भी सोना भी है
अब उसी को सोच कर के जागना भी सोना भी है
उस को तुम ने पा लिया है पर ये भी तुम याद रखना
जो भी चीज़ें हैं मुयस्सर उन को इक दिन खोना भी है
भाई बहनों में ये खट्टे मीठे झगड़े होने देना
कल विदाई में लिपट कर के उन्हें फिर रोना भी है
ला चुका हूँ मैं कई मोती समुंदर में उतर कर
अब समुंदर में किसी दिन डूबकर के खोना भी है
तुझ को पाने की ख़ुशी में पूरा घर मुस्काया मेरा
तुझ को खोने से दुखी कोई सिसकता कोना भी है
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बेक़रारी है बहुत दिल में तुम्हारे जाने से
फूल खिल जाते थे बे-मौसम तुम्हारे आने से
फूल खिल जाते थे बे-मौसम तुम्हारे आने से
है मोहब्बत तुम को तो फिर कर के दिखलाओ मुझे
काम चलने वाला थोडी है यहाँ शर्माने से
तुम से तो अब छत पे भी आना नहीं हो पा रहा
तुम ने क्या ब्रेकअप का सोचा है फिर इस दीवाने से
जान लो इक बात ये भी मुझ से मेरे बारे में
मैं पलटता हूँ नहीं फिर रोने से पछताने से
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मिलने से रोका था इक तितली को हम ने फूल से
अपनी जाँ से मिल न पाए हम क़यामत आने तक
अपनी जाँ से मिल न पाए हम क़यामत आने तक
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