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Yuvraj Singh Faujdar

Top 10 of Yuvraj Singh Faujdar

Yuvraj Singh Faujdar

Top 10 of Yuvraj Singh Faujdar

    हर इक ख़ुशी के मौक़े' पर इक मज़हबी तकरार है
    कोई तो लाए अम्न का पैग़ाम ये दरकार है

    दहशत के बाज़ारों में मंदी कैसे आ सकती है अब
    दहशत जो फैलाते हैं अब उन की ही तो सरकार है

    जनता की जाएज़ माँगों पर बातें करें कैसे भला
    चारों तरफ़ बस बिक चुके अख़बारों की भरमार है

    अब ये अदाकारी तो लाज़िम होगी ही इन ख़बरों में
    ख़ुद उन का हाकिम भी तो अच्छा-ख़ासा इक फ़नकार है

    जिस ने सिखाई थीं वो सारी चालें उस को खेल की
    वो शख़्स ख़ुद इस खेल में अब हो गया लाचार है

    ये दोस्ती महँगी न पड़ जाए अमीर-ए-शहर को
    कब तक चलेगी एक दिन गिरनी ये भी सरकार है
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    Yuvraj Singh Faujdar
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    उस की आँखों पर भले कह दी हों ग़ज़लें तुम ने लेकिन
    हुस्न पर मतला तो मेरा ही रहेगा भारी फिर भी
    Yuvraj Singh Faujdar
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    तुम मोहब्बत हो मेरी ये भी अगर समझा न पाया
    फिर तो लानत है बहुत लानत है मेरी शा'इरी पर
    Yuvraj Singh Faujdar
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    लड़कों को इश्क़ में दिलचस्पी है
    लड़कों को आता नहीं ख़ुश रहना
    Yuvraj Singh Faujdar
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    ख़्वाब जो इक देखा है हम ने वो पूरा होना भी है
    अब उसी को सोच कर के जागना भी सोना भी है

    उस को तुम ने पा लिया है पर ये भी तुम याद रखना
    जो भी चीज़ें हैं मुयस्सर उन को इक दिन खोना भी है

    भाई बहनों में ये खट्टे मीठे झगड़े होने देना
    कल विदाई में लिपट कर के उन्हें फिर रोना भी है

    ला चुका हूँ मैं कई मोती समुंदर में उतर कर
    अब समुंदर में किसी दिन डूबकर के खोना भी है

    तुझ को पाने की ख़ुशी में पूरा घर मुस्काया मेरा
    तुझ को खोने से दुखी कोई सिसकता कोना भी है
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    Yuvraj Singh Faujdar
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    बेक़रारी है बहुत दिल में तुम्हारे जाने से
    फूल खिल जाते थे बे-मौसम तुम्हारे आने से

    है मोहब्बत तुम को तो फिर कर के दिखलाओ मुझे
    काम चलने वाला थोडी है यहाँ शर्माने से

    तुम से तो अब छत पे भी आना नहीं हो पा रहा
    तुम ने क्या ब्रेकअप का सोचा है फिर इस दीवाने से

    जान लो इक बात ये भी मुझ से मेरे बारे में
    मैं पलटता हूँ नहीं फिर रोने से पछताने से
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    Yuvraj Singh Faujdar
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    जिस्मों की भूख हम को नहीं है
    पेड़ देखे हैं फल खाते तुम ने
    Yuvraj Singh Faujdar
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    मिलने से रोका था इक तितली को हम ने फूल से
    अपनी जाँ से मिल न पाए हम क़यामत आने तक
    Yuvraj Singh Faujdar
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    मेरे दिल में सिर्फ़ सीधे लोगों की है अब जगह
    चैस में भी घोड़े की चालें नहीं चलता मैं अब
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    आँखों से भी मुस्कुराना जानती हो
    होंठों से भी काम वो ही करना है अब
    Yuvraj Singh Faujdar
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