सर रखके जिनपे रोए वो शाने चले गए
सब ज़िंदगी से यार पुराने चले गए
तुम सच समझ रहे हो जिसे ख़्वाब है फ़क़त
हम ख़ुद को नींद में ये बताने चले गए
कुछ ज़ख़्म तेरी याद का पानी हैं भर रहे
कुछ ज़ख़्म मेरी प्यास बुझाने चले गए
अब है नहीं ये वक़्त यहाँ पर किसी का भी
अपने कभी थे जो वो ज़माने चले गए
आकर कहा उन्होंने मिलेंगे वो रात में
फिर दिन कहीं वो और बिताने चले गए
इक शख़्स था ‘अभी’ कि जो हासिल न हो सका
इक आरज़ू थी हम जिसे पाने चले गए
हमको ख़ुशी की इसलिए चाहत नहीं हुई
हमको तो ग़म से ही कभी फ़ुर्सत नहीं हुई
कुछ भी कहो मगर ये त'अज्जुब की बात है
उसको किसी भी शख़्स की आदत नहीं हुई
इक बार ऐसा ज़ख़्म किसी ने मुझे दिया
फिर ज़िंदगी में कोई भी हसरत नहीं हुई
जाते हुए वो एक निशानी था दे गया
उस एक चीज़ की भी हिफ़ाज़त नहीं हुई
मिलने गए थे उससे मुझे झूठ बोल कर
तुमको ज़रा भी यार नदामत नहीं हुई
सारे ग़लत जो काम हैं हमने किए मगर
जज़्बात की है हमसे तिजारत नहीं हुई
काफ़ी दिनों से याद भी उसको नहीं किया
काफ़ी दिनों से कोई अज़िय्यत नहीं हुई
शायद थी ‘जॉन’ को भी मोहब्बत किसी से या
शायद ‘अभी’ को भी है मोहब्बत नहीं हुई
ज़ुबाँ से बात जो निकले वो फ़िर वापस नहीं आती
सो मैं कहने से पहले बात कह कर देख लेता हूँ
आसमां पे जा चुकी है जो ज़मीं की बात है
जो कहीं से सुन रहे हैं वो कहीं की बात है