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Top 10 of
Mohammed Ibrahim
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Mohammed Ibrahim
सफ़र
घर
है
ठिकाना
है
हमें
घर
जो
बनाना
है
सभी
को
है
हँसाना
भी
सभी
का
ग़म
उठाना
है
गया
बचपन
किताबों
में
जवानी
में
कमाना
है
बहन
भी
है
हमें
जिस
को
पढ़ाना
है
सिखाना
है
हाँ
बाबा
और
अम्मा
को
हमें
हज
भी
कराना
है
हूँ
बेटा
और
होने
का
फ़राइज़
है
निभाना
है
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Mohammed Ibrahim
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काश
ऐसी
भी
कोई
सूरत
हो
ख़्वाब
है
जो
मिरा
हक़ीक़त
हो
सोचता
हूँ
तो
दिल
धड़कता
है
तुम
मिरी
साँस
की
सहूलत
हो
तुम
ही
को
देख
कर
गुज़ारी
है
ज़िंदगी
ऐसी
जिस
सेे
वहशत
हो
ख़ुश्की
लब
पर
नहीं
तिरे
जँचती
चूम
लूँ
मैं
अगर
इजाज़त
हो
हम
नहीं
जौन
पर
न
जाने
क्यूँँ
तुम
मिरी
आख़िरी
मोहब्बत
हो
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Mohammed Ibrahim
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दोस्त
इक
हर
दफ़ा
होता
है
देख
लूँ
हौसला
होता
है
पेड़
से
ही
हों
क्यूँ
राहतें
ज़ख़्म
भी
तो
घना
होता
है
देख
लेता
हूँ
बाबा
को
मैं
पस्त
जब
हौसला
होता
है
हम
चले
आप
को
छोड़
के
फ़ैसला
फ़ैसला
होता
है
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Mohammed Ibrahim
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हलाकत
भी
मुसीबत
भी
अजब
सी
है
मुहब्बत
भी
अकेली
ही
करे
दिल
पर
सियासत
भी
हुकूमत
भी
लुटा
देना
किसी
पर
दिल
है
रुतबा
भी
रिवायत
भी
नहीं
मुमकिन
इकट्ठी
हो
मुहब्बत
और
नफ़रत
भी
ख़राबी
ही
ख़राबी
है
अजब
सा
रोग
क़िस्मत
भी
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Mohammed Ibrahim
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कि
हम
तुम
और
ये
बहरें
भी
क़ातिल
हैं
कि
हमने
क़त्ल
कर
डाला
ख़यालों
का
ग़ज़ल
बस
आज
होती
है
मुहब्बत
पर
ग़ज़ल
तो
एक
मैदाँ
था
सवालों
का
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Mohammed Ibrahim
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हटा
या
ख़ुद
ही
नक़्श-ए-पा
हमारा
चले
इन
पे
नहीं
बेटा
हमारा
फटे
जब
पैरहन
तब
याद
आया
उसे
सर
को
ढके
रखना
हमारा
चले
वो
जाए
जी
ले
ज़िंदगी
को
ख़ुदा
पे
छोड़
दे
जीना
हमारा
बड़ा
बनता
है
घर
का
है
बड़ा
पर
अभी
भी
दिल
है
ये
बच्चा
हमारा
मरेंगे
साथ
हम
भी
और
दिल
भी
कि
बनता
ही
नहीं
बचना
हमारा
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Mohammed Ibrahim
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मुझ
सेे
दिन
रात
ये
आईना
कर
रहा
बात
ये
आईना
टूट
ही
जाएँगे
लोग
वो
जिन
की
है
ज़ात
ये
आईना
जब
हँसू
तो
हँसे
साथ
ये
रोए
भी
साथ
ये
आईना
भूल
जो
जाऊँ
तो
सामने
लाए
औक़ात
ये
आईना
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Mohammed Ibrahim
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अब
वो
पहली
सी
शिद्दत
नहीं
है
इश्क़
में
वो
तमाज़त
नहीं
है
ऐसे
जैसे
कि
दम
घुट
रहा
है
साँस
लेने
की
फ़ुर्सत
नहीं
है
कल
तलक
था
वो
जब
साथ
थे
हम
अब
से
वो
ख़ूब-सूरत
नहीं
है
माँग
कर
जो
मिले
है
'मुहम्मद'
वो
मुहब्बत
मुहब्बत
नहीं
है
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Mohammed Ibrahim
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कभी
सच
तो
कभी
धोका
रहा
है
हमेशा
दिल
को
ये
ख़तरा
रहा
है
अजब
है
ना
के
जिसने
साथ
छोड़ा
निभाए
कोई
तो
यादआ
रहा
है
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Mohammed Ibrahim
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गर्म
सूरज
पस्त
जब
भी
हौसला
कर
मौत
है
या
ज़िंदगी
है
फ़ैसला
कर
Mohammed Ibrahim
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