इक तिरा दिल रखने में कितने ख़सारे हो गए
    जो भी थे बैअत में मेरे सब किनारे हो गए
    Ali Mohammed Shaikh
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    बेवफ़ा क्या सुन रहा हूँ कोई तेरा हो गया
    कौन है मेरी जगह पर क़ब्र में जो सो गया
    Ali Mohammed Shaikh
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    बोलता हूँ तो दुनिया रंजिशे जताती हैं
    चुप रहूँ तो लोगो को वहशतें सताती हैं
    Ali Mohammed Shaikh
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    माथे पे उसके मेरे होंठों का बल वही है
    तो जान ले ना मेरी जाने ग़ज़ल वही है
    Ali Mohammed Shaikh
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    सिवा तस्वीर के तेरी ,हमारे पास कुछ होगा
    तलाशी ले के ले जाओ तुम्हारा खास कुछ होगा
    Ali Mohammed Shaikh
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    मेरी नज़रे उठी उठी, तेरी नज़रें झूकी झुकी
    तोल रहे हैं प्यार को जैसे दो पैमानों में
    Ali Mohammed Shaikh
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    ठुकरा के प्यार मेरा वो जाता है जान दे
    दिल मेरा पहली बार क्या टूटा है जान दे
    Ali Mohammed Shaikh
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    मैं अकेला हूँ मगर खूब तजुर्बा है मुझे
    कारवां दूर तलक कैसे खींचना है मुझे

    मैं हमेशा से ही देता रहा तवजजा तुझे
    गौर से तू ही कहां यार देखता है मुझे
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    Ali Mohammed Shaikh
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    जब से तेरी निगाह में सजने लगे है हम
    खुद को बड़ा हसीन समझने लगे है हम
    Ali Mohammed Shaikh
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    नज़र, अब ख्वाब से आंखों की कुछ बनती नहीं आती
    कई दिन से पड़ोसी छत पे वो लड़की नहीं आती

    यही आदत तग़ाफ़ुल की बुरी लगती तुम्हारी है
    इधर हम याद करते है, उधर हिचकी नहीं आती
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    Ali Mohammed Shaikh
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