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जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ
मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की
नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की
कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की
किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की
ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की
ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ
मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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हम नहीं हो पाय हैं अब तक ख़ुदी के
आप को अपना बना कर क्या करेंगे
जानते हो उलझने हैं ज़िन्दगी में
आप को उन
में फँसाकर क्या करेंगे।
रात भर हैं जागते सपने सँजोते,
आप की नींदें उड़ाकर क्या करेंगे
आप जो हैं देख कर मुँह फेर लेते
आप के सपने सजा कर क्या करेंगे
आज राहों में बिछे हैं फूल माना
पाँव के छाले भुला कर क्या करेंगे
कारना
में जानती है ज़िन्दगी ये
ज़िन्दगी से मुँह छुपा कर क्या करेंगे
अब नहीं होते रुआँसे गाँव तजकर,
गाँव में इक घर बना कर क्या करेंगे
ज़िन्दगी भर की कमाई शा'इरी है,
शा'इरी से जी चुरा कर क्या करेंगे।
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परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे
ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ
ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ
समाँ से
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इक अधूरा गीत पूरा कर रहा हूँ
और ख़ुद को मैं अधूरा कर रहा हूँ
और ख़ुद को मैं अधूरा कर रहा हूँ
ये ख़बर फैली कि क़िस्सा कर रहा हूँ
मैं कि हर क़िस्सा अधूरा कर रहा हूँ
शा'इरी आसाँ नहीं होती अमन जी
रोज़ लगता है यही, क्या कर रहा हूँ
आप को ये प्रेम झूठा लग रहा है
आप से मैं प्रेम सच्चा कर रहा हूँ
ज़िन्दगी के गीत भी मैं गा न पाया
ज़िंदगी में ख़ाक अच्छा कर रहा हूँ
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सुख़न की राह में बढ़ते मुसाफ़िर
सँभल कर, सामने कोहरा घना है
सँभल कर, सामने कोहरा घना है
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