इक अधूरा गीत पूरा कर रहा हूँ

और ख़ुद को मैं अधूरा कर रहा हूँ

ये ख़बर फैली कि क़िस्सा कर रहा हूँ
मैं कि हर क़िस्सा अधूरा कर रहा हूँ

शा'इरी आसाँ नहीं होती अमन जी
रोज़ लगता है यही, क्या कर रहा हूँ

आप को ये प्रेम झूठा लग रहा है
आप से मैं प्रेम सच्चा कर रहा हूँ

ज़िन्दगी के गीत भी मैं गा न पाया
ज़िंदगी में ख़ाक अच्छा कर रहा हूँ

— Aman G Mishra

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