सुना हम ने अमीरी में मज़ा है
मगर फिर भी फ़कीरी को चुना है
बहुत हैं धन जुटाने के तरीके
जहाँ में अब, ग़रीबी इक सज़ा है
सुख़न की राह में बढ़ते मुसाफ़िर
सँभल कर, सामने कोहरा घना है
अमन की चाह में ज़िंदा है मानव
अमन की राह में कांटा बिछा है
कि जिस के सामने लम्बा है रस्ता
उसी के पाँव में कांटा लगा है
— Aman G Mishra















