Aadi Ratnam

Aadi Ratnam

@High_aadi

Aadi Ratnam Yaanii shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aadi Ratnam Yaanii's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

याद आता है मुसलसल तेरा मुझ सेे कहना एक ही शख़्स मुहब्बत के लिए काफ़ी है — Aadi Ratnam
हर एक ज़ाविए से वो बदन शगुफ़्ता है मुझे ये डर है कि मुरझा न जाए छूने से — Aadi Ratnam
फिर एक बार वही रात आई जो मुझ सेे बिताई जाती नहीं पर बितानी पड़ती है — Aadi Ratnam
मेरी तन्हाई मुझे पूछ रही है अक्सर कैसा होता है मेरे यार ये तन्हा होना — Aadi Ratnam
तू मुझे यूँँ नज़र-अंदाज़ न कर क्या मालूम जो तुझे चाहिए वो मुझ में भी हो सकता है — Aadi Ratnam
मेरी मुफ़लिसी पे अक्सर मेरे यार यूँँ न हँस तू न ख़ुदा करे कि तुझ पे भी मुसीबत आए कोई — Aadi Ratnam
रास्ता कहकशाँ का इतना भी मुश्किल तो नहीं इल्म क्या क्या नहीं कर सकता जहाँ में यारों — Aadi Ratnam
जब भी होता हूँ मैं बेचैन अकेलेपन से तो मुसलसल नए लोगों से मिला करता हूँ — Aadi Ratnam
न इश्क़ वो करे तो क्या करे भला कोई यही तो काम किया जाता है जवानी में — Aadi Ratnam
मैं मुस्तक़िल पड़ा रहता हूँ ऐसे बिस्तर पर कि जैसे काम किए जा रहा हूँ मेहनत का — Aadi Ratnam
यार धोका खा रहे जब ग़ैर की बातों में आ कर कब तलक हम भी सफ़ाई यार को देते रहेंगे — Aadi Ratnam
कैसे बताएँ हाल मुहब्बत में क्या हुआ उस को मिले गुलाब तो काँटे मिले मुझे — Aadi Ratnam

Ghazal

एक तिनके का सहारा भी तो हो सकता है और फिर उस पे गुज़ारा भी तो हो सकता है ऐन मुमकिन है मुझे छोड़ के जाने वाला शख़्स वो यार तुम्हारा भी तो हो सकता है वो जिसे मैं न समझ पा रहा हूँ क्या मालूम वो तेरी ओर इशारा भी तो हो सकता है ऐन मुमकिन है कि जिस हाल में था मैं पहले हाल मेरा वो दुबारा भी तो हो सकता है वो ख़सारा जो मुहब्बत में हुआ है मुझ को वो ख़सारा मुझे प्यारा भी तो हो सकता है क्या ज़रूरी है मेरे साथ रहे वो हर दम एक वादे पे गुज़ारा भी तो हो सकता है यूँँ न हँस हँस के बता बात सभी को उस की वो मुझे जान से प्यारा भी तो हो सकता है कोई दरिया कभी ख़ारा नहीं होता लेकिन मेरे अश्कों से वो ख़ारा भी तो हो सकता है एक दरिया को समुंदर में जा के है मिलना एक दरिया को किनारा भी तो हो सकता है — Aadi Ratnam
तेरी गलियों से कुछ इस तरह गुज़र जाऊँगा जो नज़र आऊँ न तुझ को तो किधर जाऊँगा पहले उतरूँगा तेरे चश्म के काशाने में फिर तेरी नज़रों से यकलख़्त उतर जाऊँगा तेरी रुख़्सत से भला और तो क्या ही होगा मैं तो बिखरा था अबस और बिखर जाऊँगा और तड़पूँगा जलाने से ये भी मुमकिन है पर मैं लोहा हूँ जो जलने से निखर जाऊँगा ऐन मुमकिन है कि फिर इश्क़ के इस दरिया में तैर सकता हूँ मैं जो डूब अगर जाऊँगा नाम बदनाम हो चाहे मिले मुझ को शोहरत काम कुछ ऐसा गज़ल-गोई में कर जाऊँगा तोड़ दूँगा मैं सभी नफ़रतों की दीवारें मैं मुहब्बत ही मुहब्बत यहाँ भर जाऊँगा — Aadi Ratnam
क्या एक बस मुझी को मुहब्बत नहीं मिली हैं और वो जिन्हें भी ये सोहबत नहीं मिली मुझ को मिला चराग़ जहाँ में बुझा हुआ आँखें मिली मुझे तो बसारत नहीं मिली उड़ने लगा तो ऐसे गिराया गया मुझे जो बैठने गया तो इजाज़त नहीं मिली सारा लहू निचोड़ लिया ज़िन्दगी मगर मेहनत के बावजूद भी बरकत नहीं मिली मैं मानता गया तेरी हर बात को मगर हर बात में मुझे तो सदाक़त नहीं मिली ये नाज़ हैं उसे कि बहुत ख़ूब-रू हैं वो मुझ को ये ग़म सताए कि सीरत नहीं मिली वो कौन हैं जिन्हे ये मुहब्बत मिली अदम उन सेे हमारी कोई भी आदत नहीं मिली — Aadi Ratnam