मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ मैं किधर जाता हूँवो जहाँ बोलती है बस मैं उधर जाता हूँवो कहीं छाँव की मानिंद ठहर जाती हैमैं कहीं धूप की मानिंद बिखर जाता हूँ— Aadi Ratnam