kya ek bas mujhi ko muhabbat nahin mili | क्या एक बस मुझी को मुहब्बत नहीं मिली

  - Aadi Ratnam

क्या एक बस मुझी को मुहब्बत नहीं मिली
हैं और वो जिन्हें भी ये सोहबत नहीं मिली

मुझको मिला चराग़ जहाँ में बुझा हुआ
आँखें मिली मुझे तो बसारत नहीं मिली

उड़ने लगा तो ऐसे गिराया गया मुझे
जो बैठने गया तो इजाज़त नहीं मिली

सारा लहू निचोड़ लिया ज़िन्दगी मगर
मेहनत के बावजूद भी बरकत नहीं मिली

मैं मानता गया तेरी हर बात को मगर
हर बात में मुझे तो सदाक़त नहीं मिली

ये नाज़ हैं उसे कि बहुत ख़ूब-रू हैं वो
मुझको ये ग़म सताए कि सीरत नहीं मिली

वो कौन हैं जिन्हे ये मुहब्बत मिली अदम
उन सेे हमारी कोई भी आदत नहीं मिली

  - Aadi Ratnam

Aadat Shayari

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