चूम ले मेरे सनम लब से मुझे
इस घड़ी की आस है कब से मुझे
अब नहीं रहता कोई अपना ख़याल
प्यार तुम से हो गया जब से मुझे
और क्या माँगू दुआ में तू मिला
अब कोई ख़्वाहिश नहीं रब से मुझे
मैं भी तो इंसान हूँ तुझ सा तो फिर
देखता है क्यूँँ तू मज़हब से मुझे
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