अपनी तरक्कियाँ वो सुनाने लगे मुझे
मेयार दोस्त मेरा दिखाने लगे मुझे
क्या दोस्ती मिली है हैं अहबाब क्या मेरे
गैरों के सामने भी गिराने लगे मुझे
मुझको जहाँ में ग़म के सिवा कुछ मिला नहीं
ये जानते हुए भी सताने लगे मुझे
मतलब तलक रफ़ीक़ मुझे याद करते थे
मतलब निकल गया तो भुलाने लगे मुझे
मैं वो दिया हूँ जिसको जलाया हैं रात भर
सूरज निकल गया तो बुझाने लगे मुझे
जिसको नहीं ख़बर कि हैं क्या बहर दरअसल
वो भी गज़ल की बात बताने लगे मुझे
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