अपनी तरक्कियाँ वो सुनाने लगे मुझे

मेआ'र दोस्त मेरा दिखाने लगे मुझे

क्या दोस्ती मिली है हैं अहबाब क्या मेरे
गैरों के सामने भी गिराने लगे मुझे

मुझ को जहाँ में ग़म के सिवा कुछ मिला नहीं
ये जानते हुए भी सताने लगे मुझे

मतलब तलक रफ़ीक़ मुझे याद करते थे
मतलब निकल गया तो भुलाने लगे मुझे

मैं वो दिया हूँ जिस को जलाया हैं रात भर
सूरज निकल गया तो बुझाने लगे मुझे

जिस को नहीं ख़बर कि हैं क्या बहर दरअसल
वो भी ग़ज़ल की बात बताने लगे मुझे

— Aadi Ratnam

More by Aadi Ratnam

Other ghazal from the same pen

See all from Aadi Ratnam →

Dosti Shayari Collection

Shers of dosti shayari collection.

All Dosti Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling