तुम्हें न रूठ के यूँँ मुझ सेे जाना चाहिए था

मुझे सताने तुम्हें यार आना चाहिए था

मैं अब समझ गया तुम मुझ पे क्यूँ बिगड़ती थी
तुम्हें बिछड़ने का कोई बहाना चाहिए था

ज़रा सी बात पे तुम छोड़ कर गई मुझ को
ज़रा सी बात पे तो रूठ जाना चाहिए था

अगर वो बात थी तो मुझ से क्यूँ छुपा रक्खी
अगर ये बात हैं तो फिर बताना चाहिए था

बस इतना काम मुहब्बत में करना था तुम को
बिछड़ते वक़्त ज़रा मुस्कुराना चाहिए था

मुलाहिज़ा भी नहीं शे'र पर करे कोई
कम-अज़-कम आपने मिस्रा उठाना चाहिए था

— Aadi Ratnam

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