एक कली को यार चमन में ऐसे सींचा जाता हैं
जब वो गुज़रे तो लगता हैं एक बग़ीचा जाता हैं
उस की सूरत की क्या कहिए फिर भी लोगों की नज़रें
ताकती रहती हैं जब पल्लू ऊँचा नीचा जाता हैं
जिस्म कोई बलखाती नदिया बादल से गेंसू लेकिन
एक खरोंचा जाता हैं तो एक से खींचा जाता हैं
अपनी यादों का मेला वो ले जाती हैं जब दूजे घर
तब दीवार-ओ-दर जाते हैं बा'द दरीचा जाता हैं
— Aadi Ratnam















